अनूप कुमार सैनी
रोहतक। जिन उद्योग धंधों में खतरनाक रासायनों का भंडारण व इस्तेमाल होता है, उन उद्योगों के लिए प्रदेश सरकार ने एक व्यापक योजना तैयार की है। इस योजना के तहत खतरनाक रासायनों का इस्तेमाल करने वाले कारखानों को मु य आपातकाल योजना के साथ एक अलग से ऑफ साईट एमरजेंसी प्लान भी तैयार करना होगा। इस प्लान को जिला प्रशासन द्वारा मानीटर किया जाएगा ताकि किसी भी हादसे के दौरान तुरन्त बचाव एवं राहत कार्य शुरू किए जा सके।
जिला आपदा समूह का भी होगा गठन
इस आफ साईट एमरजेंसी प्लान की समीक्षा के लिए प्रदेश के सभी जिलों में एक आपदा समूह का गठन किया जाएगा। इस आपदा समूह की 45 दिन में एक बार बैठक होगी और कैमिकल एक्सीडेंट (ई.पी.पी.आर.)रूल्ज, 1996 के तहत इस बैठक की सूचना प्रदेश के चीफ इंस्पेक्टर फैक्टरीज को भी देना अनिवार्य होगा। जिला स्तर पर इस आपदा समूह के प्रमुख की जि मेदारी जिला उपायुक्त की होगी। जिला स्तरीय आपदा समूह की तर्ज पर प्रदेश स्तर पर भी एक आपदा समूह का गठन किया जाएगा। जिसका मुखिया मु य सचिव को बनाया गया है।
मुख्य आपातकाल इंतजामों से हटकर होगा आफ साईट प्लान
प्रदेश के श्रम आयुक्त की ओर से जारी निर्देशों के तहत यह आफ साईट प्लान केवल उन्हीं कारखानों में लागू होगा। जो कारखाने निर्माण, भंडारण तथा खतरनाक रासायनों का आयात नियम, 1989 के दायरे में आते हैं। आमतौर पर आगजनी व अन्य प्राकृतिक या मानवजनित आपदाओं के लिए एक आन साईट आपातकालीन योजना तैयार की जाती है लेकिन खतरनाक रासायनों का भंडारण व इस्तेमाल करने वाले कारखानों को रासायनिक हादसों के दौरान बचाव, राहत तथा पुनर्विस्थापन आदि कार्यों में किसी प्रकार की परेशानी न हो, इसके लिए अलग से आफ साईट प्लान तैयार करना होगा। श्रम विभाग के आयुक्त की ओर से जारी निर्देश झज्जर जिले की अधिकतम दुर्घटना जोखिम (एम.ए.एच.) श्रेणी वाली औद्योगिक इकाईयों पर भी लागू होंगे। इन इकाईयों में इस्तेमाल होने वाले खतरनाक रासायनों के मद्देनजर श्रमायुक्त ने लोगों की जान माल की सुरक्षा के लिए इन उद्योगों को संवेदनशील श्रेणी में शामिल किया है। जिसके चलते श्रम आयुक्त ने जिला प्रशासन को इन इकाईयों में आफ साईट एमरजेंसी प्लान तैयार कराने के निर्देश दिए है।
केंद्र सरकार भी करेगी मदद
मानव जीवन के लिए खतरनाक रासायनों का इस्तेमाल करने वाली औद्योगिक इकाईयों में आफ साईट एमरजेंसी प्लान तैयार करने के लिए केंद्र वन एवं पर्यावरण मंत्रालय भी वित्तीय मदद करेगा। केंद्रीय वन एवं पर्यावरण मंत्रालय की ओर से यह प्लान तैयार करवाने वाली क पनियों को 75 प्रतिशत तक की वित्तीय सहायता दी जाएगी। इस प्लान के लिए केंद्रीय वन एवं पर्यावरण मंत्रालय ने 10 सलाहकर संस्थानों की एक सूची भी जारी की है। इन संस्थानों को औद्योगिक इकाईयों में ऐसी आपातकालीन योजना तैयार कराने की विशेषज्ञता भी हासिल है।
जिले में होंगे व्यापक इंतजाम
जिला उपायुक्त अजीत बालाजी जोशी ने इन निर्देशों की जानकारी देते हुए बताया कि अधिकतम दुर्घटना जोखिम श्रेणी में शामिल उद्योगों को आफ साईट एमरजेंसी प्लान तैयार करना बेहद जरुरी है। ऐसे उद्योगों में काम करने वाले कर्मचारियों तथा आमजन की सुरक्षा के मद्देनजर इन निर्देशों को स ती से लागू किया जाएगा। ताकि भविष्य में किसी प्रकार की दुर्घटना के होने वाले नुकसान को कम किया जा सके। इन निर्देशों के तहत एक गाइडलाइन जारी की गई है, जिससे संबंधित उद्योगों को इन निर्देशों का पालन करने में गंभीरता दिखानी होगी।
रोहतक। जिन उद्योग धंधों में खतरनाक रासायनों का भंडारण व इस्तेमाल होता है, उन उद्योगों के लिए प्रदेश सरकार ने एक व्यापक योजना तैयार की है। इस योजना के तहत खतरनाक रासायनों का इस्तेमाल करने वाले कारखानों को मु य आपातकाल योजना के साथ एक अलग से ऑफ साईट एमरजेंसी प्लान भी तैयार करना होगा। इस प्लान को जिला प्रशासन द्वारा मानीटर किया जाएगा ताकि किसी भी हादसे के दौरान तुरन्त बचाव एवं राहत कार्य शुरू किए जा सके।
जिला आपदा समूह का भी होगा गठन
इस आफ साईट एमरजेंसी प्लान की समीक्षा के लिए प्रदेश के सभी जिलों में एक आपदा समूह का गठन किया जाएगा। इस आपदा समूह की 45 दिन में एक बार बैठक होगी और कैमिकल एक्सीडेंट (ई.पी.पी.आर.)रूल्ज, 1996 के तहत इस बैठक की सूचना प्रदेश के चीफ इंस्पेक्टर फैक्टरीज को भी देना अनिवार्य होगा। जिला स्तर पर इस आपदा समूह के प्रमुख की जि मेदारी जिला उपायुक्त की होगी। जिला स्तरीय आपदा समूह की तर्ज पर प्रदेश स्तर पर भी एक आपदा समूह का गठन किया जाएगा। जिसका मुखिया मु य सचिव को बनाया गया है।
मुख्य आपातकाल इंतजामों से हटकर होगा आफ साईट प्लान
प्रदेश के श्रम आयुक्त की ओर से जारी निर्देशों के तहत यह आफ साईट प्लान केवल उन्हीं कारखानों में लागू होगा। जो कारखाने निर्माण, भंडारण तथा खतरनाक रासायनों का आयात नियम, 1989 के दायरे में आते हैं। आमतौर पर आगजनी व अन्य प्राकृतिक या मानवजनित आपदाओं के लिए एक आन साईट आपातकालीन योजना तैयार की जाती है लेकिन खतरनाक रासायनों का भंडारण व इस्तेमाल करने वाले कारखानों को रासायनिक हादसों के दौरान बचाव, राहत तथा पुनर्विस्थापन आदि कार्यों में किसी प्रकार की परेशानी न हो, इसके लिए अलग से आफ साईट प्लान तैयार करना होगा। श्रम विभाग के आयुक्त की ओर से जारी निर्देश झज्जर जिले की अधिकतम दुर्घटना जोखिम (एम.ए.एच.) श्रेणी वाली औद्योगिक इकाईयों पर भी लागू होंगे। इन इकाईयों में इस्तेमाल होने वाले खतरनाक रासायनों के मद्देनजर श्रमायुक्त ने लोगों की जान माल की सुरक्षा के लिए इन उद्योगों को संवेदनशील श्रेणी में शामिल किया है। जिसके चलते श्रम आयुक्त ने जिला प्रशासन को इन इकाईयों में आफ साईट एमरजेंसी प्लान तैयार कराने के निर्देश दिए है।
केंद्र सरकार भी करेगी मदद
मानव जीवन के लिए खतरनाक रासायनों का इस्तेमाल करने वाली औद्योगिक इकाईयों में आफ साईट एमरजेंसी प्लान तैयार करने के लिए केंद्र वन एवं पर्यावरण मंत्रालय भी वित्तीय मदद करेगा। केंद्रीय वन एवं पर्यावरण मंत्रालय की ओर से यह प्लान तैयार करवाने वाली क पनियों को 75 प्रतिशत तक की वित्तीय सहायता दी जाएगी। इस प्लान के लिए केंद्रीय वन एवं पर्यावरण मंत्रालय ने 10 सलाहकर संस्थानों की एक सूची भी जारी की है। इन संस्थानों को औद्योगिक इकाईयों में ऐसी आपातकालीन योजना तैयार कराने की विशेषज्ञता भी हासिल है।
जिले में होंगे व्यापक इंतजाम
जिला उपायुक्त अजीत बालाजी जोशी ने इन निर्देशों की जानकारी देते हुए बताया कि अधिकतम दुर्घटना जोखिम श्रेणी में शामिल उद्योगों को आफ साईट एमरजेंसी प्लान तैयार करना बेहद जरुरी है। ऐसे उद्योगों में काम करने वाले कर्मचारियों तथा आमजन की सुरक्षा के मद्देनजर इन निर्देशों को स ती से लागू किया जाएगा। ताकि भविष्य में किसी प्रकार की दुर्घटना के होने वाले नुकसान को कम किया जा सके। इन निर्देशों के तहत एक गाइडलाइन जारी की गई है, जिससे संबंधित उद्योगों को इन निर्देशों का पालन करने में गंभीरता दिखानी होगी।
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