अनूप कुमार सैनी
किसानों ने जिला प्रशासन से की बर्बाद हुई फसल का मुआवजा देने की मांग
रोहतक, गांव कंसाला के पास से गुजर रही जसराना माइनर सोमवार रात को टूट गई, जिससे कंसाला व मोरखेड़ी गांवों की सैंकड़ों एकड़ जमीन जलमग्र हो गई। किसानों ने इस जमीन में से कुछ हिस्से में गेहूं व सरसों की बिजाई कर रखी थी तथा कुछ में धान की खड़ी व कटी हुई फसल थी। फसल पूरी तरह जलमग्र होने से किसानों को भारी नुकसान हुआ है। माइनर के टूटने की सूचना पर सिंचाई विभाग के जूनिया अभिंयता (जे.ई.) व अन्य कर्मचारी मौके पर पहुंचे और मंगलवार दोपहर को जे.सी.बी. की मदद माइनर की पटड़ी पर मिट्टी डाल कर मर मत की गई।
किसानों ने सिंचाई विभाग के अधिकारियों पर माइनर की उचित मर मत न रखने का आरोप लगाया है, जिसकी वजह से यह माइनर टूटी है। किसानों ने जिला प्रशासन से बर्बाद हुई फसल का मुआवजा देने की मांग की है ताकि उनके नुकसान की भरपाई हो सके। प्राप्त जानकारी के अनुसार जसराना माइनर गांव कंसाला व मोरखेड़ी से भी होकर गुजरती है। कुछ दिनों पहले ही सिंचाई विभाग की ओर से इस माइनर में पानी छोड़ा गया था। सोमवार रात को अचानक गांव कंसाला निवासी अशोक पुत्र चंद्र सिंह के खेत के पास माइनर में बिलों से पानी रिसाव होना शुरू हो गया।
ग्रामीणों को जब इसकी जानकारी मिली तो उन्होंने इसकी सूचना तुरंत सिंचाई विभाग के अधिकारियों को दे दी। सूचना मिलते ही जे.ई. अशोक शर्मा चार बेलदार व एक मेड के साथ मौके पर पहुंचे और माइनर से पानी रिसाव को रोकने का प्रयास करने लगे लेकिन पानी का रिसाव कम होने की बजाय बढ़ता ही जा रहा था और कुछ ही देर में देखते ही देखते माइनर की पटड़ी का कटाव शुरू हो गया और करीब 20 फीट तक माइनर की पटड़ी का कटाव हो गया। ऐसे में माइनर का सारा पानी कंसाला व मोरखेड़ी के किसानों की जमीन में घुसा जा रहा था। आसपास की सारी जमीन जलमग्र हो गई। मंगलवार सुबह जे.ई. अशोक शर्मा की ओर से मौके पर एक जे.सी.बी. मशीन बुलाई तथा पटड़ी को मिट्टी से भरने का काम शुरू किया गया। उधर विभागीय अधिकारियों की ओर से माइनर में पानी भी पीछे से रोक दिया गया था। दोपहर करीब 12 बजे पटड़ी को मिट्टी से भरकर उसे पूरी तरह बांध दिया गया लेकिन तब तक दोनों गांवों के किसानों की करीब 200 एकड़ से ज्यादा जमीन फसल पानी में बिल्कुल पूरी तरह डूब चुकी थी।
कंसाला निवासी घीसा, बिजेंद्र, ओमप्रकाश, होशियार सिंह, महेंद्र व मोरखेड़ी निवासी जयपाल, बिजेंद्र, चंद्र आदि ने बताया कि उन्होंने गेहूं व सरसों की बिजाई कर रखी थी तथा कुछ जमीन पर अब ाी धान की फसल खड़ी थी तथा कुछ जमीन में धान की कटी फसल पड़ी हुई थी तो पानी में डूबने की वजह से खराब हो गई है। उन्होंने बताया कि उनके खेतों में अब भी इतना पानी भरा हुआ है कि वे अब इसमें सरसों या गेहूं की बिजाई भी नहीं कर सकते हैं।
सिंचाई विभाग के अधिकारियों पर लगाया लापरवाही का आरोप
किसानों ने आरोप लगाया कि सिंचाई विभाग के अधिकारियों की लापरवाही की वजह से ही माइनर के इतना बड़ा कटाव हो गया, जिससे उन्हें नुकसान उठाना पड़ रहा है। अगर विभागीय अधिकारी समय रहते माइनर में पानी को बंद करवा और जे.सी.बी. मंगवा कर कटाव को भरने का प्रयास करते तो उन्हें इतना बड़ा नुकसान नहीं होता। इसके अलावा विभाग की ओर से माइनर में पानी छोडऩे से पहले बिल व अन्य सुराखों को बंद कर देना चाहिए और माइनर की पटड़ी को भी ठीक तरह से बांध देना चाहिए ताकि माइनर के टूटने की नौबत ही नहीं आए।
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