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Monday 14 July 2014

आक्रोशित लोगों ने की तालाबंदी

सिरसा। वार्ड 22, 23 व 24 के निवासियों का आज जनस्वास्थ्य विभाग के खिलाफ गुस्सा फूटा।  क्षेत्र में सीवर लाईन क्षतिग्रस्त होने के कारण गलियों में पानी भरने की समस्या से निजात दिलाने की मांग को लेकर तीनों वार्डों के लोग एकत्रित होकर बाईपास रोड स्थित जनस्वास्थ्य विभाग के एसई कार्यालय के समक्ष और ताला जड़ दिया। करीब एक घंटा प्रदर्शन करने के बाद समस्या का हल किए जाने का आश्वासन मिलने पर लोगों ने ताला खोला।
    आज सुबह करीब नौ बजे वार्ड 22, 23 व 24 के लोग एकत्रित होकर जनस्वास्थ्य विभाग के एसई कार्यालय पहुंचे। पार्षद प्रतिनिधि हरदास सिंह रिंकू, संदीप, हरपाल, सुखदेव सहित तीनों वार्डों के सैंकड़ों की संख्या में एकत्रित लोगों ने एसई कार्यालय के मुख्यद्वार को ताला जड़ दिया। वहां पहुंचे कर्मचारियों को अंदर नहीं जाने दिया गया और अंदर से किसी को बाहर नहीं निकलने दिया गया। लोगों का कहना है कि उनके मोहल्लों में सीवर लाईन टूटी हुई है। जगह-जगह से टूटी सीवर लाईन के कारण गंदा पानी सड़कों पर जमा है। यही नहीं प्लाटों में भरा पानी उनके मकानों की नींव को क्षतिग्रस्त कर रहा है। विगत दिनों पीर बस्ती में अधिकारियों की लापरवाही के कारण गिरे मकानों का उदाहरण देते हुए लोगों ने कहा कि वे सुरक्षित नहीं हैं। गंदे पानी की बदबू के कारण उनका जीना मुहाल है ओर बीमारियों की आंशका बढ़ गई है। लोगों ने कहा कि सीवर का पानी पेयजल आपूर्ति में भी मिलकर आने लगा है। कई बार विभाग के अधिकारियों को इस बारे में मौखिक रूप से शिकायत की जा चुकी है लेकिन कोई सुनवाई नहीं हो रही। मजबूरन उन्हें ताला बंदी जैसे कदम उठाने पड़े हैं। करीब एक घंटे बाद विभाग के अधिकारियों ने उनके साथ मौके पर जाकर समस्या देखने और जल्द हल करवाने का आश्वासन देकर ताला खुलवाया। मिली जानकारी के अनुसार क्षेत्र के लोगों ने इसके बाद उपायुक्त से मिलकर भी समस्या के समाधान की मांग की।

बीजेपी में शामिल हुए नेहरा

सिरसा। वरिष्ठ नेता व पूर्व मंत्री जगदीश नेहरा ने आज कांग्रेस को अलविदा कहते हुए बीजेपी का दामन थाम लिया। नेहरा ने समर्थकों सहित दिल्ली स्थित बीजेपी के मुख्यालय में पहुंचकर पार्टी में शामिल होने की घोषणा की। पिछले कुछ वर्षों से कांग्रेस पार्टी में उनकी अनदेखी हो रही थी जिसके चलते वे स्वयं को उपेक्षित महसूस कर रहे थे।
    उल्लेखनीय है कि नेहरा  चार दशक से कांग्रेस पार्टी में थे। दो बार वे मंत्री भी बने और कांग्रेस संगठन में भी महत्वपूर्ण पदों पर रहे। 2005 में नेहरा रानियां से चुनाव लडऩे के इच्छुक थे लेकिन पार्टी ने उन्हें टिकट नहीं दिया। इसके बाद 2009 के विस चुनावों में भी उनकी अनदेखी की गई। कांग्रेस में नेहरा की पहचान शैलजा गुट के नेता के रूप में थी। समर्थकों के बढ़ते दबाव के चलते उन्होंने पार्टी छोडऩे का निर्णय लिया।

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