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Wednesday 13 August 2014

लगातार बदलते समीकरणों से राजनीतिक पंडित भी सकते में

ज्यों-ज्यों चुनाव की आहट नजदीक से सुनाई देने लगी है, त्यों-त्यों सिरसा में माहौल अधिक गर्माने लगा है। सिरसा के समीकरण इस बार जिस तरह लगातार बदलते दिखाई दे रहे हैं, उससे जान पड़ता है कि इस बार चुनाव काफी दिलचस्प रहने वाले हैं। प्रदेश में इस बार कई दलों का नवागमन हुआ है। इससे समीकरण और अधिक पेचीदा हो गए हैं। हालात ऐसे हैं कि राजनीतिक पंडित भी स्पष्ट रूप से स्थिति आंकने में नाकाम साबित हो रहे हैं। समीक्षकों की मानें तो इस बार सभी सर्वे फेल हो जाएंगे।
पिक्चर अभी बाकी है...
सिरसा। अभी तक के समीकरणों को ध्यान में रखें तो सिरसा में हरियाणा लोकहित पार्टी और इंडियन नेशनल लोकदल के बीच कांटे की टक्कर होगी। लेकिन पिक्चर अभी बाकी है। अभी कांग्रेस उम्मीदवार की घोषणा होनी है। चुनावों की तिथि की घोषणा होनी है। और यदि अतीत पर गौर फरमाएं तो सही मायने में जीत-हार की असली तस्वीर आखिरी पांच दिनों में ही साफ हो पाती है।
गोपाल कांडा के कारण सबसे 'महंगा' साबित होगा सिरसा
सिरसा की बात करें तो यह लोकसभा चुनावों की ही भांति प्रदेश की सबसे हॉट सीटों में शुमार रहेगी। इस बात का अंदाजा अभी से होने भी लगा है। इसका एक बड़ा कारण यह भी है कि हालिया विधायक तथा प्रदेश में पदार्पण करने वाले एक नए दल के मुखिया गोपाल कांडा की 'कर्मस्थलीÓ भी सिरसा ही है। गोपाल कांडा प्रदेश की राजनीति में पिछले  पांच सालों में सबसे अधिक छाए रहने वाला चेहरा हैं। इसी के साथ ही वे विरोधियों के सीधे निशाने पर हैं। गोपाल कांडा के कारण ही प्रदेश की इस सिरसा सीट को सबसे 'महंगीÓ सीट भी माना जाए तो गलत न होगा। हालांकि अभी तक कांडा ने यहां से लडऩे का अधिकारिक ऐलान नहीं किया है, लेकिन वे सिरसा में आयोजित एक रैली में यहीं से चुनाव लडऩे की घोषणा कर चुके हैं। फिलहाल वे प्रदेशभर में अपनी पार्टी के लिए जनसभाएं कर समर्थन जुटाने में जुटे हैं लेकिन अन्य दल अपनी राह में सबसे बड़ी बाधा गोपाल को ही मानकर चल रहे हैं। इसलिए अपने चुनाव अभियान के दौरान सबसे अधिक घेराव कांडा का ही किया जा रहा है।
इनेलो ने डाला आग में घी
खेल में अपना मोहरा उतारते ही प्रदेश के मुख्य विपक्षी दल इंडियन नेशनल लोकदल ने आग में घी डालने जैसा काम किया। सिरसा की राजनीति के एक गुमनाम शख्स को बड़ी ही महारत के साथ चंद दिनों में चर्चित कर खेल को दिलचस्प बना दिया। इनेलो ने जब अपने उम्मीदवार की घोषणा की तो कोई नहीं जानता था कि मक्खन लाल सिंगला कौन है लेकिन इनेलो के प्रबंधन ने ऐसा कमाल कर दिखाया कि हरेक शख्स सिंगला को जानने लगा है। 
कांगेस में तूफान से पहले की शांति
कांग्रेस ने भी अभी तक प्रदेश की किसी सीट के लिए उम्मीदवार की घोषणा नहीं की है लेकिन यह तय है कि टिकट का बंटवारा होने के साथ ही कांग्रेस में बड़ा तूफान उठने वाला है। प्रदेश पर नजर गड़ाएं तो भगदड़ पहले ही मची हुई है। सिरसा में कांग्रेस का हर बड़ा नेता स्वयं को टिकट का प्रबल दावेदार बता रहा है। पार्टी भी  इन्हीं परिस्थितियों को भांपते हुए जल्दबाजी में फैसला नहीं लेने के मूड में दिख रही है। सिरसा का लंबे समय तक प्रतिनिधित्व करने वाले स्वर्गीय लछमण दास अरोड़ा की राजनीतिक वारिस उनकी पुत्री सुनीता सेतिया कांग्रेस की टिकट की सबसे बड़ी दावेदार मानी जा रही हैं। उन्होंने तो अपनी टिकट फाइनल मानते हुए काफी समय पहले से ही चुनावी अभियान शुरू किया हुआ है। इसी के साथ प्रदेश उपाध्यक्ष नवीन केडिया, प्रदेश प्रवक्ता होशियारी लाल शर्मा, किसान प्रकोष्ठ के ब्लॉक अध्यक्ष भूपेश मेहता सहित कांग्रेस की टिकट के चाहवानों की सूची लंबी है। सभी अपने-अपने स्तर पर अपने लिए ही वोटों की मांग करते गांव-शहर के दौरे कर रहे हैं।
भाजपा को मोदी लहर से आस, हजकां भी अटकी
        हजकां-भाजपा गठबंधन अभी तक स्पष्ट न होने के कारण दोनों दलों के नेता बीच मंझधार अटके हुए हैं। भाजपा के नेता अभी भी मोदी लहर की आस पर टिके हैं और क्षेत्र में प्रचार में जुटे हैं जबकि हजकां का प्रचार बैठकों तक सीमित दिखाई दे रहा है। लेकिन क्षेत्र के समीकरणों पर नजर दौड़ाएं इन दोनों दलों की यहां कहीं भी दाल गलती दिखाई नहीं दे रही। 
बसपा, माकपा सहित कई अन्य दल भी दौड़ में
        बहुजन समाज पार्टी, माक्र्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी, समता, जनचेतना पार्टी सहित कई अन्य दल भी अपनी उपस्थिति दर्ज करवाने को तैयार हैं। कम्युनिस्ट दल जहां प्रदर्शनों, बिजली आंदोलनों से लोगों का ध्यान बटोर रहे हैं वहीं अन्य दल यहां सिर्फ उपस्थिति दर्ज करवाते दिखाई दे रहे हैं। जमीनी स्तर पर इनके प्रयास बहुत कम दीख रहे हैं। 
18 को लगेगी आचार संहिता!
सिरसा। आचार संहिंता को लेकर भी चर्चाएं गर्म हैं। 15 अगस्त तक किसी भी हाल में निर्वाचन आयोग आचार संहिंता लगाने के मूड में नहीं है। इसके बाद 18 अगस्त को आचार संहिंता लगने की उम्मीद जताई जा रही है। इसी के साथ ही आयोग द्वारा चुनावों की घोषणा भी की जा सकती है।  उल्लेखनीय है कि हरियाणा के साथ कई अन्य राज्यों में भी चुनाव करवाए जाने हैं। निर्वाचन आयोग सभी जगह चुनाव की तिथियां घोषित करने से पहले सभी बातों को ध्यान में रखते हुए फैसला लेगा। साथ ही त्यौहारी सीजन से पूर्व ही चुनाव सम्पन्न करवाए जाने पर भी बल दिया जा रहा है। इससे संभावना जताई जा रही है कि आयोग स्वतंत्रता दिवस के बाद किसी भी दिन आचार संहिंता लगाने के साथ ही चुनावों की तिथि भी घोषित कर देगा। 


चुनाव नजदीक आते ही गांव शहरों में जब भी दो-लोग इक_ा होते हैं तो चुनावी चर्चा शुरू हो ही जाती है। चाहे घर-मकान हो, या नाई की दुकान हो... किसी नेता का ऑफिस या फिर गांव की चौपाल हो... सब जगह चुनावों पर लोग अपने-अपने कयास, अपनी-अपनी राय देने लगते हैं। ऐसे में जब गांव की चौपाल पर विभिन्न दलों से संबंधित लोग अपने-अपने विचार रखते हैं तो बहस भी काफी रोचक होती है। ऐसे ही कुछ आम लोगों के विचारों को पाठकों के सामने आम बोलचाल की भाषा में ही रखने का प्रयास है 'चौपाल की चुनावी चटर-पटर'। इस धारावाहिक की पहली कड़ी पर ज़रा गौर फरमाइएगा.....
कांडा नै तो पल्ले से दियो है
गांव की चौपाल पर एक कांडा समर्थक ताऊ दाना राम और इनेलो समर्थक सरदार करनैल के बीच बहस शुरू हुई....
ताऊ दाना : अरै मन्नै तो यो बेरो है के कांडा कम से कम ग्रांट आला पीसा तो कोनी खावे। उलटा अपने पल्ले से ही देवै है। बाकी पार्टियां के नेता तो जेब से एक पीसा कोनी लगावे अर जनता आला और खा जे हंै।
सरदार करनैल : ताऊ चश्मा ला सही नंबर दा, फिर समझ आऊगी। कांडा जिन्ने लांदा है, उस तों ज्यादा कमाण दा जुगाड़ पहले ही कर लैंदा है। बाकी आपां तां सिरसा दी चौधर वापस ल्याणी है। हुड्डे ने देख रोहतक नूं की बणा ता, जे हुण वी सिरसा विच मुखमंतरी दी चौधर नहीं आंदी तां फिर कोई हाल नहीं रहणा।
दाना : अरै तो चौधर तो कांडा कै मुख्यमंत्री बणन तैं बी आ ई ज्यैगी।
करनैल: (हंसते हुए) ओ ताऊ, तैनूं सच्ची चश्मे दी जरूरत है। किस दुनिया विच रहना हैं। तैनूं की लगदा कि कांडा मुखमंतरी बण जूगा। 
दाना : अरै मन्नै तो यो बेरा सै के सरकार कोई बी बणा ले, कांडा ने तो अपना जुगाड़ लगा ए जाणा सै। चौधर तो सरकार मैं रहण की ई सै। तो तूं के सोचै है के इनेलो सरकार बणा ज्यागी? अरै बापड़ा बीजेपी आला कद ऊं भूखे शेर आली तरियां घात लगा के बैठ्या सै।
 ईबकै हिरणी फसी सै, जाण तो कोनी देयै। कांडे को के है, 4-5 सीटां बी काढ ली तो तेरे चौधरी ही नोहरे काढते फिरैंगे, देख लिए। 
करनैल : ताऊ तूं वी तेरहवीं गल्ल करया कर, तैनूं लगदा कांडे ते इनेलो वाले कदे हुण रल सकते ने।
दाना : तो के सै? भाई सियासत को कच्चा लगै सै तूं। बिहार म्हैं नीतिश-लालू क_ा हो सकै तो कांडा बी तो ईब पार्टी को मालक सै। अर फेर कुर्सी तो इनेलो आलां नै हीं चहिए नी। (और जोर से हंसा)
करनैल : ओ छड्ड ताऊ! देख ली इस वार सिरसा तों ही सरकार चलणी है ते इनैलो ही चलाऊ। सिरसा जिले दियां तां पंजे सीटां इनेलो दियां पक्कियां ने। ते इह समझ लै कि सिरसा पंज उंगला वाला सज्जा हत्थ है ते फिर एही हत्थ बाकी पार्टियां वालयां दे धाफा मार के कुर्सी ते बैठू। देखदा चल्ल।
दाना : मन्नै लागे तन्नै चश्मा उतारण की जरूरत सै, सही नंबर आला कोणी। अर तूं ईब लड़ाई आली बातां पै आण लाग रैया सै।
करनैल : (हंसते हुए) ताऊ तूं तां गुस्सा ही कर गया यार, चल छड्ड आपां की लैणा, टैम दस्सूगा। तूं इह दस्स के तेरे कोल दारू दी पेटी पहुंच गई के नहीं। 
और चौपाल में चुप्पी साध कर दोनों की बहस सुन रहे सभी लोगों ने जोर का ठहाका लगाया और अपने घरों की ओर चल दिए।

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